गंतव्य India कोटा सात अजूबों का पार्क

त अजूबों का पार्क.

कोटा India 25° N · 75° E

कोटा के किशोर सागर झील के किनारे स्थित यह पार्क 20 करोड़ रुपये की लागत से बना है। इसे आगरा के कुशल कारीगरों ने तैयार किया है। 2013 में खुलने के बाद से अब तक यहाँ 25 लाख से ज्यादा लोग आ चुके हैं। प्रवेश शुल्क मात्र ₹20 है।

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सत्यापित April 2026
सात अजूबों का पार्क · कोटा
Time needed
1 से 2 घंटे
Entry
₹20 (भारतीय वयस्क) / ₹40 (विदेशी) / ₹5-10 (बच्चे)
Access
व्हीलचेयर के लिए सुगम
Best season
अक्टूबर से मार्च तक (ठंडा और शुष्क मौसम)

एक परिचय।

Audiala संपादकीय टीम द्वारा ऐतिहासिक अभिलेखों, स्थापत्य अभिलेखागारों और स्थानीय विशेषज्ञता से शोधित।

कोचिंग सेंटरों और औद्योगिक कारखानों के लिए पहचाने जाने वाले कोटा शहर ने जब किशोर सागर झील के किनारे ₹20 करोड़ की लागत से दुनिया के सात अजूबों की प्रतिकृतियां खड़ी कीं, तो यह एक साहसिक प्रयोग था। 1346 में बने इस ऐतिहासिक जलस्रोत के किनारे सात एकड़ में फैला 'सेवन वंडर्स पार्क' आज कोटा की एक ऐसी पहचान बन चुका है, जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दबाव के बीच छात्रों के लिए एक सुकून भरी जगह है। शाम ढलते ही जब रंगीन रोशनी में ये स्मारक नहाते हैं और झील के पानी में इनकी परछाइयाँ तैरती हैं, तो यह नजारा किसी कल्पना लोक जैसा लगता है।

यहाँ का अनुभव कुछ अजीब पर दिलचस्प है। जहाँ एक ओर संगमरमर से बना छोटा ताजमहल खड़ा है, वहीं दूसरी ओर फाइबरग्लास से बनी स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी हवा में खड़ी नजर आती है। एफिल टॉवर और गीज़ा के पिरामिड के बीच टहलते हुए आप एक क्षण में दुनिया के अलग-अलग कोनों की यात्रा कर लेते हैं। रात के समय जब ये सात अजूबे दूधिया और रंगीन रोशनी में चमकते हैं, तो किशोर सागर का शांत पानी इन्हें अपने भीतर समा लेता है।

दिसंबर 2013 में खुलने के बाद से यह पार्क न केवल पर्यटकों के लिए, बल्कि कोटा के निवासियों के लिए भी एक पसंदीदा जगह बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि इसी पार्क की सफलता से प्रेरित होकर दिल्ली में 'वेस्ट टू वंडर' पार्क का निर्माण हुआ। बॉलीवुड ने भी इसे पहचाना—2017 में 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' की शूटिंग के लिए जब पार्क को एक दिन के लिए बंद किया गया, तो यह कोटा का सबसे चर्चित दिन बन गया। आज यह पार्क उस शहर के लिए एक जरूरी 'प्रेशर वाल्व' है, जो अपनी पढ़ाई की भागदौड़ के लिए जाना जाता है।

01 क्या देखें.

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अंधेरे के बाद सात अजूबों का जादू

दिन के उजाले में यहाँ आपको केवल कंक्रीट की संरचनाएं और कुछ मामूली निशान दिखेंगे, लेकिन सूरज ढलते ही यह जगह पूरी तरह बदल जाती है। रंग-बिरंगी फ्लडलाइट्स हर स्मारक पर पड़ती हैं—सफेद संगमरमर का ताज नीली रोशनी में नहा उठता है, एफिल टॉवर सुनहरी आभा बिखेरता है और कोलोसियम एम्बर और लाल रंगों के बीच झूमता है। शाम 7 बजे शुरू होने वाला म्यूजिकल फाउंटेन शो पार्क की रौनक बढ़ा देता है और किशोर सागर झील एक दूसरे आसमान जैसी लगने लगती है। लोग यहाँ वास्तुकला की सटीकता देखने नहीं, बल्कि पांच मिनट में मिस्र से ब्राजील तक की सैर करने का आनंद लेने आते हैं। अपना फोन फुल चार्ज करके आएं, क्योंकि यहां हर कदम पर एक नई तस्वीर लेने का मन करेगा।
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जगमंदिर महल और किशोर सागर झील

किशोर सागर झील के बीचों-बीच स्थित यह द्वीप महल सात अजूबों के पार्क से करीब 270 साल पुराना है, लेकिन ज्यादातर पर्यटक इसे अनदेखा कर देते हैं। यह आपकी बड़ी भूल हो सकती है। 1743 से 1745 के बीच लाल बलुआ पत्थर से बना जगमंदिर महल पार्क के प्रवेश द्वार से नाव द्वारा पहुंचा जा सकता है। असल रोमांच तो इस नाव की सवारी में है—1346 में धीर देव द्वारा बनाई गई यह झील माचू पिचू से भी पुरानी है। पानी के बीच से आपको वह नजारा मिलता है जहाँ आधुनिक अजूबों की रोशनी और राजपूताना वास्तुकला एक ही फ्रेम में समा जाते हैं। नाव का किराया पार्क की एंट्री फीस से भी कम है, इसे बिल्कुल न छोड़ें।
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वे सूचना पट्ट जिन्हें लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं

यहाँ के हर प्रतिकृति के पास एक विस्तृत सूचना बोर्ड लगा है, जो मूल स्मारक के इतिहास और निर्माण की कहानी बताता है। उदाहरण के लिए, गीज़ा के महान पिरामिड के बोर्ड पर लिखा है कि मूल पिरामिड 450 फीट ऊंचा है, इसका आधार 13 एकड़ में फैला है और इसे बनने में 23 साल लगे थे। कोलोसियम के बोर्ड पर ग्लैडिएटर लड़ाइयों का जिक्र है। सेल्फी लेने की जल्दबाजी में लोग अक्सर इन बोर्ड्स को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इन्हें पढ़ने से यह जगह एक साधारण पार्क से बदलकर एक ओपन-एयर म्यूजियम बन जाती है। बस दस मिनट रुककर इन्हें पढ़ें; आप रोम की कतारों में खड़े होने वाले पर्यटकों से कहीं ज्यादा जानकारी लेकर लौटेंगे।
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03 Visitor logistics.

एक अच्छे सफर का व्यावहारिक ढाँचा — संक्षेप में रखा गया।

कैसे पहुँचें

कोटा जंक्शन रेलवे स्टेशन पार्क से महज 6-7 किमी दूर है, जो दिल्ली-मुंबई मुख्य लाइन से अच्छी तरह जुड़ा है। स्टेशन के बाहर से ऑटो-रिक्शा वाले आपको सीधे पार्क तक छोड़ देंगे, जिसका किराया लगभग ₹50-80 तक होता है। अगर आप हवाई मार्ग से आ रहे हैं, तो निकटतम हवाई अड्डा 245 किमी दूर जयपुर सांगानेर है, जहाँ से सड़क मार्ग द्वारा यहाँ पहुँचने में करीब 3.5 घंटे लगते हैं। अपनी कार से आने वालों के लिए परिसर में पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है।

खुलने का समय

साल 2026 के अनुसार, पार्क कार्यदिवसों (weekdays) पर दोपहर 2:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है। सप्ताहांत और सार्वजनिक छुट्टियों पर समय थोड़ा बढ़ जाता है, जो दोपहर 12:00 बजे से रात 10:00 बजे तक होता है। बुधवार को पार्क सुबह 11:00 बजे ही खुल जाता है। ध्यान रखें कि त्योहारों के दौरान समय बदल सकता है, इसलिए जाने से पहले स्थानीय स्तर पर इसकी पुष्टि जरूर कर लें।

कितना समय लगेगा

अगर आप सिर्फ सातों अजूबों को देखना और तस्वीरें लेना चाहते हैं, तो 45 मिनट काफी हैं। लेकिन यदि आप इत्मीनान से हर स्मारक की बारीकियों को पढ़ना चाहते हैं, शाम 7:00 बजे होने वाले म्यूजिकल फाउंटेन का आनंद लेना चाहते हैं और किशोर सागर झील में बोटिंग करना चाहते हैं, तो कम से कम 2 घंटे का समय लेकर चलें। झील के बीचों-बीच स्थित जगमंदिर पैलेस की सैर के लिए एक घंटा और बढ़ा लें—यह वाकई देखने लायक है।

टिकट और शुल्क

2026 के आंकड़ों के मुताबिक, प्रवेश शुल्क ₹20 (भारतीय वयस्क) और ₹40 (विदेशी नागरिक) है। बच्चों के लिए यह महज ₹5-10 है। कभी-कभी प्रवेश द्वार पर ₹50 का कैमरा शुल्क भी लिया जाता है। बोटिंग के लिए आपको अलग से टिकट लेना होगा। फिलहाल यहाँ ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा नहीं है, इसलिए अपने पास नकद रखें।

सुगमता

सातों अजूबों को जोड़ने वाले रास्ते पक्के और समतल हैं, जिससे व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाले आगंतुकों को कोई परेशानी नहीं होती। करीब 7 एकड़ में फैला यह पार्क बहुत बड़ा नहीं है, इसलिए पूरा चक्कर आसानी से लगाया जा सकता है। हालाँकि, नाव की सवारी के दौरान व्हीलचेयर से चढ़ने में थोड़ी मुश्किल हो सकती है।

05 Tips for visitors.

छोटी-छोटी बातें जो पूरा दिन बदल देती हैं।

शाम का समय सबसे बेहतर

शाम 5:30 बजे के आसपास पहुँचना सबसे सही रहता है। आप दिन की रोशनी में स्मारकों को देख पाएंगे और फिर सूर्यास्त के बाद रंगीन फ्लडलाइट्स में उनका बदलना एक अलग ही अनुभव होगा। एफिल टॉवर और ताजमहल की झील में बनती परछाइयां कैमरे में कैद करने के लिए बेहतरीन हैं। शाम 7:00 बजे म्यूजिकल फाउंटेन का शो जरूर देखें।

जगमंदिर पैलेस को न छोड़ें

अधिकांश लोग सिर्फ अजूबों को देखकर निकल जाते हैं, लेकिन किशोर सागर झील में स्थित 18वीं सदी का लाल बलुआ पत्थर वाला जगमंदिर पैलेस नजरअंदाज करने लायक नहीं है। रात के समय, जब पूरा पार्क रोशनी से नहाया होता है, तब वहां से झील का नजारा सबसे शानदार दिखता है।

झील के किनारे से फोटो

सबसे अच्छी तस्वीरें झील के किनारे से आती हैं। रात में जब रंगीन रोशनी झील के पानी पर पड़ती है, तो हर स्मारक का प्रतिबिंब दोगुना खूबसूरत हो जाता है। कम रोशनी में शॉट लेने के लिए मिनी ट्राइपॉड का उपयोग करें, क्योंकि हाथ से खींची गई तस्वीरें धुंधली हो सकती हैं।

गर्मी से बचें

मई और जून में कोटा का तापमान 45°C तक पहुँच जाता है, जो काफी कष्टदायक हो सकता है। अक्टूबर से मार्च के बीच यहाँ आना सबसे सुखद है, जब शाम का तापमान 15-20°C के आसपास रहता है। मानसून के दौरान आकाश तो खूबसूरत दिखता है, लेकिन कभी-कभी पार्क बंद भी हो सकता है।

भीड़ से बचने का सुझाव

यहाँ महीने में 30,000 से अधिक पर्यटक आते हैं, जिनमें से ज्यादातर सप्ताहांत पर होते हैं। यदि आप भीड़ से बचकर शांति से तस्वीरें लेना चाहते हैं, तो किसी कार्यदिवस (विशेषकर बुधवार) की शाम को जाना सबसे बेहतर निर्णय होगा।

पास में कहाँ खाएं

restaurant
स्थानीय ढाबे

04 A history of reinvention.

बीस करोड़, 150 कारीगर और पर्यटन की एक अनोखी बाजी

कोटा कभी पर्यटन के नक्शे पर नहीं था। यहाँ की अर्थव्यवस्था कोचिंग सेंटरों और चंबल नदी के किनारे बसे रसायनों के कारखानों पर टिकी थी। ऐसे में ₹20 करोड़ खर्च करके सात अजूबों की प्रतिकृतियां बनाने का फैसला एक बड़ा जुआ था।

कोटा के शहरी सुधार न्यास (UIT) ने यह जोखिम उठाया और 18 महीने की कड़ी मेहनत के बाद 150 से ज्यादा कारीगरों ने इस पार्क को हकीकत में बदला।

वह मोड़

शांति धारीवाल, वास्तुकार और आगरा के कारीगर

8 दिसंबर 2013 को जब राजस्थान के तत्कालीन शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल ने पार्क का उद्घाटन किया, तो कोटा ने पहली बार कुछ ऐसा देखा जो पहले कभी नहीं था। वास्तुकार अनूप बर्तारिया ने इन स्मारकों को केवल खड़ा नहीं किया, बल्कि इनके साथ विस्तृत जानकारी वाले बोर्ड भी लगाए ताकि आने वाले लोग इनके इतिहास को समझ सकें।

यहाँ की सबसे खास बात इसके कारीगर हैं। भरतपुर, धौलपुर और आगरा के कुशल शिल्पकारों को इस काम के लिए बुलाया गया था। दिलचस्प बात यह है कि ताजमहल की प्रतिकृति बनाने वाले कारीगरों में वे लोग भी शामिल थे, जिनकी जड़ें आगरा के उसी शहर से जुड़ी हैं जहाँ असली ताजमहल खड़ा है। एक कोचिंग हब में बैठकर उन्होंने अपनी कला का जो नमूना पेश किया, वह आज भी लोगों को हैरान करता है।

यूआईटी (UIT) का यह ₹20 करोड़ का निवेश उम्मीद से कहीं ज्यादा सफल रहा। जहाँ दिल्ली जैसे महानगरों ने बाद में कचरे से कलाकृतियाँ बनाने का विचार अपनाया, वहीं कोटा ने पत्थर, संगमरमर और लोहे के साथ जो 'ओरिजिनल' नींव रखी, वह आज भी अपनी जगह कायम है।

बॉलीवुड और पार्क का संगम

2017 में निर्देशक शशांक खेतान की फिल्म 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' की शूटिंग के लिए जब पार्क के दरवाजे एक पूरे दिन के लिए बंद किए गए, तो वरुण धवन और आलिया भट्ट की एक झलक पाने के लिए प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस एक दिन की शूटिंग ने कोटा को राष्ट्रीय मानचित्र पर ला खड़ा किया। आज लाखों लोग जो शायद कोटा के बारे में नहीं जानते थे, वे इस पार्क को एक फिल्मी लोकेशन के रूप में पहचानते हैं।

इतिहास का दर्पण: किशोर सागर

इस पार्क की खूबसूरती के पीछे किशोर सागर झील का 678 साल पुराना इतिहास है, जिसे 1346 में बूंदी के राजकुमार धीर देव ने बनवाया था। यह झील आधुनिक प्रतिकृतियों के लिए एक प्राकृतिक आईना है। सूरज डूबने के बाद जब एफिल टॉवर की रोशनी झील पर पड़ती है, तो ऐसा लगता है जैसे सदियों पुराने पानी में आधुनिक दुनिया की झलक मिल रही हो।

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06 अक्सर पूछे जाने वाले।

सात अजूबों का पार्क के बारे में यात्री जो सवाल हमें सबसे ज़्यादा भेजते हैं।

क्या कोटा का सात अजूबे पार्क घूमने लायक है?

बिल्कुल, अगर आप कोटा में हैं तो यहाँ जरूर आएं। मात्र ₹20 का टिकट राजस्थान में शायद ही आपको कहीं और इतना सस्ता मनोरंजन दे पाए। यहाँ बनी प्रतिकृतियाँ काफी बारीकी से बनाई गई हैं। किशोर सागर झील के किनारे होने के कारण रात में जब इनकी रोशनी पानी में चमकती है, तो ऐसा लगता है जैसे आप एक ही जगह पर पूरी दुनिया की सैर कर रहे हों।

सात अजूबे पार्क घूमने में कितना समय लगता है?

पूरे पार्क को आराम से देखने के लिए 1 से 2 घंटे काफी हैं। शाम 6:00 बजे के आसपास पहुंचना सबसे सही रहता है, ताकि आप दिन की रोशनी और शाम की जगमगाहट दोनों देख सकें। शाम 7:00 बजे होने वाला म्यूजिकल फाउंटेन शो इस सैर का सबसे बेहतरीन समापन है।

यहाँ का प्रवेश शुल्क क्या है?

भारतीय वयस्कों के लिए प्रवेश शुल्क ₹20 है, विदेशियों के लिए ₹40, और 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ₹5 से ₹10 के बीच है। कभी-कभी टिकट की कीमतों में बदलाव हो सकते हैं, इसलिए गेट पर काउंटर से पुष्टि करना हमेशा बेहतर होता है।

पार्क खुलने और बंद होने का समय क्या है?

आम दिनों में यह पार्क दोपहर 2:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है। सप्ताहांत (वीकेंड) और छुट्टियों के दिन यह दोपहर 12:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुला रहता है। त्योहारों के दौरान समय बदल सकता है, इसलिए जाने से पहले स्थानीय स्तर पर जानकारी जरूर ले लें।

पार्क में कौन-कौन से सात अजूबों की प्रतिकृतियां हैं?

इस पार्क में ताजमहल, गीज़ा का महान पिरामिड, एफिल टॉवर, पीसा की झुकी हुई मीनार, क्राइस्ट द रिडीमर, कोलोसियम और स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की प्रतिकृतियां मौजूद हैं। हर स्मारक के पास एक सूचना बोर्ड लगा है, जो इसे सिर्फ एक सजावटी जगह के बजाय एक जानकारीपूर्ण अनुभव बनाता है।

क्या फोटोग्राफी के लिए यह पार्क अच्छा है?

हाँ, सूर्यास्त के बाद यह जगह फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन हो जाती है। किशोर सागर झील में ताजमहल और एफिल टॉवर की परछाई और रंगीन फ्लडलाइट्स कैमरे में बहुत खूबसूरत दिखती हैं। शाम 6:30 से 8:00 बजे के बीच का समय फोटो खींचने के लिए सबसे सटीक है।

क्या पार्क में किसी बॉलीवुड फिल्म की शूटिंग हुई है?

जी हाँ, 2017 की बॉलीवुड फिल्म 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' की शूटिंग यहाँ हुई थी। फिल्म के दृश्यों में वरुण धवन और आलिया भट्ट यहाँ नजर आए थे। उस दिन शूट के लिए पार्क को आम जनता के लिए बंद रखा गया था, जिसने इस जगह को पूरे देश में पहचान दिलाने का काम किया।

कोटा रेलवे स्टेशन से यहाँ कैसे पहुंचे?

कोटा जंक्शन से पार्क की दूरी लगभग 6-7.5 किलोमीटर है। स्टेशन के बाहर से ऑटो या टैक्सी लेकर आप 15-25 मिनट में यहाँ पहुंच सकते हैं। ड्राइवर को बस 'सात अजूबे पार्क' या 'किशोर सागर' बोलें, वे रास्ता अच्छी तरह जानते हैं।

स्रोत

सत्यापित, और दिखाया गया।

Audiala संपादकीय टीम द्वारा ऐतिहासिक अभिलेखों, स्थापत्य अभिलेखागारों और स्थानीय विशेषज्ञता से शोधित और लिखित।

अंतिम समीक्षा: April 2026
विकिपीडिया — सात अजूबों का पार्क, कोटा

उद्घाटन तिथि, वास्तुकार (अनूप बर्तारिया), निर्माण लागत (₹20 करोड़), कारीगरों की उत्पत्ति, और दिल्ली के वेस्ट टू वंडर पार्क पर पार्क के प्रभाव के लिए प्राथमिक संदर्भ

tourism-rajasthan.com

पुष्टि की गई उद्घाटन तिथि, ₹20 करोड़ की लागत, म्यूजिकल फाउंटेन शो का समय (शाम 7:00 बजे), और प्रवेश शुल्क

tripnetra.com

पुष्टि की गई उद्घाटन तिथि (8 दिसंबर, 2013) और कैमरा शुल्क (₹50)

holidayrider.com

पुष्टि की गई उद्घाटन तिथि और सामान्य आगंतुक जानकारी

traxplorers.com

प्रतिकृति आयाम (पीसा की मीनार ~18 मीटर, कोलोसियम ~15 मीटर x 12 मीटर) और बुधवार के खुलने का समय — अपुष्ट, इस प्रकार चिह्नित

jaipurexplore.com

बद्रीनाथ की दुल्हनिया फिल्म की शूटिंग का किस्सा और पार्क की राष्ट्रीय पहचान पर इसका प्रभाव

planextrip.com

व्हीलचेयर पहुंच की पुष्टि

wanderlog.com

बद्रीनाथ की दुल्हनिया की शूटिंग के दौरान बॉलीवुड फिल्म विवरण और भीड़ की प्रतिक्रिया

अंतिम समीक्षा:

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