इतिहास और संरक्षण
औपनिवेशिक काल में एरविकुलम ब्रिटिश प्लांटर्स के लिए खेल आरक्षित क्षेत्र था। वे यहां शिकार और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए आते थे। क्षेत्र की अछूती वनों में खेल-जानवरों का शिकार मनोरंजन के साथ लाभ के लिए भी किया जाता था। (स्पाइस ट्री मुन्नार)
1879 में कर्नल डगलस हैमिल्टन और जे.डी. मुनरो जैसे शुरुआती यूरोपीय अन्वेषक इस क्षेत्र में बसने लगे। उन्होंने उत्तर त्रावणकोर प्लांटेशन और कृषि सोसायटी की स्थापना की। सोसायटी ने स्थानीय राजा पून्जत राजा से रियायती मूल्य पर 227 वर्ग मील भूमि प्राप्त की। भूमि सोसायटी के नागरिकों के बीच कृषि के लिए नीलाम की गई और यहां कॉफ़ी तथा सिनकोना जैसी फसलें उगाई गईं। (मुन्नार पर्यटन)
क्षेत्र का प्रबंधन 1971 तक कनन देवन हिल प्रोड्यूस कंपनी के पास था। 1928 में गठित उच्च रेंज गेम संरक्षित संघ एक गैर-सरकारी संगठन के रूप में इसके प्रबंधन और संरक्षण से जुड़ा था। 1971 में केरल सरकार ने कनन देवन हिल प्रोड्यूस (भूमि पुनर्ग्रहण) अधिनियम 1971 के तहत क्षेत्र का नियंत्रण फिर से प्राप्त किया। 1975 में नीलगिरी ताहर के निवास-स्थान की रक्षा के लिए एरविकुलम-राजामला वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया। 1978 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला; इसका पारिस्थितिक, जंतु, भूआकृतिक और प्राणी-विज्ञान संबंधी महत्व भी इस घोषणा का आधार था। (विकिपीडिया, मुन्नार पर्यटन, StudyIQ)
इन संरक्षण प्रयासों ने शिकार क्षेत्र को संरक्षित उद्यान में बदलने और नीलगिरी ताहर सहित उद्यान की जैव विविधता की रक्षा करने में भूमिका निभाई। आज प्रबंधन में उच्च रेंज वन्यजीव पर्यावरण संरक्षण संघ और वन विभाग सहयोग करते हैं। उद्यान का प्रबंधन केरल के वन एवं वन्यजीव विभाग, मुन्नार द्वारा भी किया जाता है और यहां के वनस्पति तथा जीव-जंतुओं की रक्षा के लिए संरक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं। संरक्षण के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं; प्रबंधन प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा और सतत पर्यटन पर ध्यान देता है, ताकि यह वन्यजीवों के लिए सुरक्षित स्थान बना रहे। (मुन्नार पर्यटन, ExploreBees, स्पाइस ट्री मुन्नार)
सांस्कृतिक महत्व
उद्यान का सांस्कृतिक महत्व स्थानीय समुदायों के इतिहास और परंपराओं से जुड़ा है। स्थानीय जनजातियां सदियों से वन के साथ सामंजस्य में रहती आई हैं। ऐतिहासिक रिकॉर्ड और मौखिक परंपराएं यहां के पौधों और जीवों के पारंपरिक चिकित्सा, अनुष्ठानों और दैनिक जीवन में महत्व को दर्शाती हैं।
क्या देखें
प्राकृतिक परिवेश और वनस्पति
उद्यान क्षेत्रीय पर्यावरणीय संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह पम्बार और पेरियार नदियों तथा चालक्कुडी नदी की सहायक नदियों का महत्वपूर्ण जलग्रहण क्षेत्र है। ये नदियां आसपास के इलाकों में पेयजल आपूर्ति और सिंचाई के लिए अहम हैं। उद्यान की स्थलाकृति में ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म और शोला—उष्णकटिबंधीय पहाड़ी वन—का मोज़ेक शामिल है। ये पश्चिमी घाट के कम से कम प्रदूषित खंडों में से हैं और वनस्पति तथा वन्यजीवों को सहारा देते हैं। (StudyIQ)
यहां की वनस्पति मुख्यतः घास के मैदानों और शोलाओं के पैच से बनी है। प्रमुख पौधों में एक्टिनोडैफने बोर्डिलियोनी, माइक्रोट्रॉपिस रेमीफ्लोरा, पिटोस्पोरम टेट्रास्पर्मियम, सिज़िगियम अर्नोटियनम, क्रिसोपोज़ोन ज़ेलानेसस, यूपेअटोरियम एडेनोफोरम और स्ट्रोबिलैंथस कुनथियानस शामिल हैं। स्ट्रोबिलैंथस कुनथियानस को नीलकुरिंजी के नाम से जाना जाता है; यह हर बारह साल में एक बार खिलता है और पहाड़ियों को नीले रंग से ढक देता है। यहां दुर्लभ स्थलीय और एपिफाइटिक ऑर्किड, जंगली बाल्सम तथा अन्य पौधे भी हैं। एपिफाइट्स दूसरे पौधों पर उगते हैं और हवा, बारिश तथा जमा मलबे से पोषक तत्व प्राप्त करते हैं। (StudyIQ)
वन्यजीव
उद्यान में स्तनधारियों की 29 प्रजातियां हैं, जिनमें से पांच केवल पश्चिमी घाट में पाई जाती हैं। इसका सबसे प्रसिद्ध निवासी लुप्तप्राय नीलगिरी ताहर है। उद्यान में इस प्रजाति की सबसे बड़ी शेष आबादी रहती है, जो इसकी वैश्विक संख्या का आधा हिस्सा है। अन्य स्तनधारियों में गौर, स्लॉथ बियर, नीलगिरी लंगूर, बाघ, तेंदुआ, विशाल गिलहरी और जंगली कुत्ते शामिल हैं। सिवेट बिल्लियां और जंगल बिल्लियां आम तौर पर शोलाओं में पाई जाती हैं, जबकि पैंथर खुले घास के मैदानों में देखे जाते हैं। यहां हाथी, लंगूर और मार्टेन भी पाए जाते हैं। (StudyIQ, ExploreBees)
पक्षी, कीट और उभयचर
यहां पक्षियों की 140 प्रजातियां दर्ज की गई हैं, जिनमें दस इस क्षेत्र की विशिष्ट प्रजातियां हैं। उल्लेखनीय पक्षियों में ग्रे-ब्रेस्टेड लॉफिंगथ्रश, नीलगिरी फ्लाईकैचर और ब्लैक-एंड-ऑरेंज फ्लाईकैचर शामिल हैं। (StudyIQ)
उद्यान में एटलस कीट भी पाया जाता है, जो अपनी तरह का सबसे बड़ा है। यहां तितलियों की 100 से अधिक किस्में पहचानी गई हैं और उभयचरों की 20 किस्में पाई जाती हैं। (ExploreBees)
व्यावहारिक आगंतुक जानकारी
दौरे के घंटे
पार्क हर दिन सुबह 7:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक खुला रहता है। नीलगिरी ताहर के वायुजन्य मौसम के दौरान, आमतौर पर फरवरी से मार्च तक, यह बंद रहता है।
टिकट
प्रवेश टिकट ऑनलाइन या प्रवेश द्वार पर खरीदे जा सकते हैं। भारतीय वयस्कों के लिए टिकट INR 125, बच्चों के लिए INR 95 और विदेशी नागरिकों के लिए INR 420 है।
यात्रा सुझाव
आरामदायक चलने वाले जूते पहनें, पानी साथ रखें और वन्यजीव देखने के लिए दूरबीन ले जाएं।
आसपास के आकर्षण और गतिविधियां
टी म्यूजियम, मट्टुपट्टी डैम और दक्षिण भारत का सबसे ऊंचा शिखर अनामुडी पीक पार्क के पास स्थित हैं। राजामला से दिखने वाला पैनोरमिक दृश्य भी उल्लेखनीय है; वहां नीलगिरी ताहर और नीलकुरिंजी फूलों को देखा और कैमरे में कैद किया जा सकता है। पार्क के वन्यजीव और इतिहास के बारे में जानने के लिए निर्देशित टूर का विकल्प भी उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
एरविकुलम नेशनल पार्क के दौरे के घंटे क्या हैं?
दौरे के समय और फरवरी से मार्च के दौरान होने वाली मौसमी बंदी की जानकारी ऊपर “दौरे के घंटे” अनुभाग में दी गई है।
एरविकुलम नेशनल पार्क के टिकट कितने हैं?
टिकट की कीमतों और टिकट खरीदने के तरीकों का विवरण ऊपर “टिकट” अनुभाग में दिया गया है।