एक परिचय।
Audiala संपादकीय टीम द्वारा ऐतिहासिक अभिलेखों, स्थापत्य अभिलेखागारों और स्थानीय विशेषज्ञता से शोधित।
एएक ऐसे राजघराने में, जो घास की रोटियों पर गुज़ारा करने के लिए जाना जाता था, सहेलियों की बाड़ी उस दौर की इंजीनियरिंग का एक नायाब नमूना है। फतेह सागर झील के किनारे बसी यह जगह महलों की चारदीवारी से दूर, रानी और उनकी सहेलियों के लिए बनाई गई एक शांत शरणस्थली थी। यहाँ के फव्वारे किसी मोटर या बिजली से नहीं, बल्कि गुरुत्वाकर्षण (gravity) के सिद्धांत पर चलते हैं। यहाँ के संगमरमरी हाथी और कमल के आकार के ताल आपको ठहरने पर मजबूर कर देंगे, क्योंकि यह राजस्थान में उन चुनिंदा जगहों में से है, जिसे पूरी तरह से महिलाओं के मनोरंजन और निजी सुकून के लिए बनाया गया था।
इस बाड़ी का नाम 'सहेलियों की बाड़ी' इसलिए पड़ा क्योंकि यह रानी की उन सहेलियों के लिए बनाया गया था, जो उनके साथ मायके से आई थीं। 'सहेली' का अर्थ यहाँ कोई सेविका नहीं, बल्कि समान सामाजिक स्तर की वे सखियाँ हैं, जो रानी के निजी जीवन का हिस्सा थीं। हालाँकि पर्यटन की किताबों में इनकी संख्या अक्सर 48 बताई जाती है, लेकिन आधिकारिक ऐतिहासिक दस्तावेजों में इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता।
आज यहाँ जो आप देखते हैं, वह फव्वारों, मंडपों और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी का एक संतुलित ताना-बाना है। बाड़ी का आकार बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन यहाँ के जल-स्रोतों का घनत्व देखते ही बनता है। गर्मी की दोपहर में जब आप यहाँ आते हैं, तो पत्थरों पर गिरते पानी की आवाज़ और ठंडी फुहारें ही आपको इस जगह की अहमियत का एहसास करा देंगी।
सबसे हैरान करने वाली बात इसकी बनावट है। यहाँ के फव्वारे 300 साल पहले की उस तकनीक से चलते हैं जिसमें बगल की फतेह सागर झील का पानी भूमिगत पाइपों के जरिए आता है। बिना किसी मशीनरी के, केवल दबाव और ढलान के सहारे पानी का ऊपर उठना 18वीं सदी के इंजीनियरों की दूरदर्शिता को दर्शाता है।
01 क्या देखें.
बिन बादल बरसात — बादलों के बिना होती बारिश
कमल तलाई — कमल कुंड और संगमरमर के हाथी
रंग महल — वह जगह जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं
चारों कुंडों की सैर — बाग को समझने का सही तरीका
02 तस्वीरों में।
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जेब में ऑडियो गाइड, ब्राउज़र में यात्रा-योजना। ठीक उसी तरह बना है जैसे आप असल में घूमते हैं।
Tickets & tours.
ये हमारे साझेदारों के निर्देशित विकल्प हैं — सीधे बुकिंग के बराबर कीमत।
कीमतें संकेतात्मक हैं — अंतिम कीमत और उपलब्धता चेकआउट पर पुष्टि की जाती है। इन लिंक से की गई बुकिंग पर Audiala को कमीशन मिल सकता है।
03 Visitor logistics.
एक अच्छे सफर का व्यावहारिक ढाँचा — संक्षेप में रखा गया।
कैसे पहुँचें
सिटी पैलेस या जगदीश मंदिर से सहेलियों की बाड़ी लगभग 3-4 किलोमीटर दूर है। ऑटो-रिक्शा वाले आपको 60 से 100 रुपये में 10-15 मिनट में यहाँ पहुँचा देंगे। यह पंचवटी/न्यू फतेहपुरा इलाके में फतेह सागर झील के किनारे स्थित है। अगर आप झील के किनारे टहल रहे हैं, तो यहाँ से पैदल चलकर 5 मिनट में पहुँचा जा सकता है। ओला और उबर भी यहाँ उपलब्ध हैं, लेकिन आधी दिहाड़ी के लिए एक ऑटो किराए पर लेना बेहतर है, ताकि आप फतेह सागर, सहेलियों की बाड़ी और मोती मगरी को एक साथ देख सकें।
खुलने का समय
वर्ष 2026 के आंकड़ों के अनुसार, यह बाड़ी प्रतिदिन सुबह 8:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक खुली रहती है। कोई साप्ताहिक अवकाश नहीं है। बंद होने के समय से 30 मिनट पहले प्रवेश बंद हो जाता है। अक्टूबर से मार्च के बीच पर्यटकों की संख्या अधिक होने पर समय शाम 7:00 बजे तक बढ़ सकता है, इसलिए गेट पर या पर्यटन विभाग के हेल्पलाइन (+91-141-5110591) पर समय की पुष्टि कर लेना समझदारी होगी।
कितना समय लगेगा
यह बाड़ी लगभग 6 एकड़ में फैली है, जिसमें चार मुख्य चौक, कमल का तालाब और फव्वारे हैं। यहाँ इत्मीनान से घूमने के लिए 45 से 60 मिनट काफी हैं। अगर आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो 1.5 घंटे का समय लेकर चलें। यहाँ की इंजीनियरिंग, विशेषकर बिना पंप के चलने वाले फव्वारे, देखने लायक हैं, इसलिए जल्दबाजी न करें।
टिकट और शुल्क
2026 के अनुसार, भारतीयों के लिए प्रवेश शुल्क लगभग 10-30 रुपये और विदेशियों के लिए 50-150 रुपये के बीच है। 5 साल से छोटे बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है। यहाँ कोई ऑनलाइन बुकिंग नहीं है, आपको गेट पर ही नकद भुगतान करना होगा। कैमरे के लिए 20-50 रुपये का अतिरिक्त शुल्क हो सकता है।
सुगमता
पूरा बगीचा समतल है और मुख्य रास्तों पर पक्की सड़कें बनी हैं, जिससे व्हीलचेयर या बच्चों की ट्रॉली ले जाना आसान है। हालांकि, फव्वारों के चबूतरे और कुछ पुरानी नक्काशी वाली जगहें थोड़ी ऊँची-नीची हो सकती हैं, इसलिए पूर्ण रूप से 'स्टेप-फ्री' होने की उम्मीद न रखें। प्रवेश द्वार के पास ही बुनियादी शौचालय की सुविधा उपलब्ध है।
05 Tips for visitors.
छोटी-छोटी बातें जो पूरा दिन बदल देती हैं।
कब जाएँ
सप्ताह के दिनों में सुबह 9 बजे से पहले पहुँचें; संगमरमर की नक्काशी पर सुबह की नरम रोशनी बहुत सुंदर लगती है और भीड़ भी कम होती है। दोपहर 11 से 2 बजे के बीच यहाँ स्कूल समूहों और पर्यटकों की काफी भीड़ हो जाती है। शाम को 4 बजे के बाद आना भी अच्छा है, ताकि उसके बाद फतेह सागर झील पर सूर्यास्त का आनंद ले सकें।
फव्वारों का समय
यहाँ के फव्वारे लगातार नहीं चलते, उन्हें कर्मचारियों द्वारा समय-समय पर चालू किया जाता है। प्रवेश टिकट लेते समय ही उनसे फव्वारे चलने का समय पूछ लें। यह बगीचा 18वीं सदी की इंजीनियरिंग का नमूना है, जहाँ फतेह सागर झील के पानी का उपयोग ग्रेविटी (गुरुत्वाकर्षण) के जरिए किया गया है—यहाँ कोई पंप या मोटर नहीं लगी है।
अनधिकृत गाइडों से बचें
गेट के पास घूमने वाले स्वयंभू गाइडों से बचें, जो अक्सर बहुत अधिक पैसे माँगते हैं। बगीचा छोटा है और आप खुद भी आराम से घूम सकते हैं। अगर आपको गाइड की जरूरत है, तो राजस्थान पर्यटन विभाग के अधिकृत गाइड की ही सेवा लें और पैसे पहले ही तय कर लें।
बाहर का भोजन
बगीचे के अंदर के कैफे के बजाय, 5 मिनट पैदल चलकर फतेह सागर झील के किनारे लग रही दुकानों पर जाएँ। वहाँ कुल्हड़ चाय और भुट्टे का स्वाद लें। अगर आपको असली राजस्थानी थाली खानी है, तो चेतक सर्कल के पास 'नटराज डाइनिंग हॉल' जाएँ, जहाँ स्थानीय लोग खाना पसंद करते हैं।
ड्रोन पर प्रतिबंध
फोन और सामान्य कैमरे से फोटो लेना नि:शुल्क है। लेकिन पूरे राजस्थान की तरह, यहाँ भी बिना पूर्व अनुमति के ड्रोन उड़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। काले पत्थर के हाथियों की मूर्तियाँ और कमल के तालाब की तस्वीरें फ्रेम करने के लिए सबसे बेहतरीन जगहें हैं।
यात्रा को जोड़ें
सहेलियों की बाड़ी को आप फतेह सागर झील, मोती मगरी और नेहरू गार्डन के साथ एक ही ट्रिप में शामिल करें। एक ऑटो किराए पर लेना सबसे किफायती विकल्प है, जो आपको 300 रुपये से कम में पूरे उत्तरी उदयपुर का चक्कर लगवा देगा।
कहाँ खाएं
इन्हें चखे बिना न जाएं
भोजन सुझाव
- check सभी चार अनुशंसित रेस्तरां सहेलियों की बाड़ी से पैदल दूरी पर (या ठीक सामने) हैं — अपनी यात्रा के बाद दूर जाने की आवश्यकता नहीं है।
- check अधिकांश प्रतिष्ठान सुबह 8:30–10:30 बजे के बीच खुलते हैं और रात 10–11 बजे तक बंद हो जाते हैं; यदि आप सुबह जल्दी या देर शाम जा रहे हैं तो उसी के अनुसार योजना बनाएं।
- check लस्सी और चाय उदयपुर के अनौपचारिक पेय हैं — एक प्रामाणिक, ताज़ा ब्रेक के लिए सरदार जी की जोरदार लस्सी आज़माएँ।
- check सहेलियों की बाड़ी के आसपास का क्षेत्र छोटा और पैदल चलने वालों के अनुकूल है; आप 5 मिनट की पैदल दूरी के भीतर कई कैफे आसानी से देख सकते हैं।
रेस्तरां डेटा Google द्वारा प्रदान
04 A history of reinvention.
शांति का वास्तुकार
महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय (1710-1734) का शासनकाल मेवाड़ के लिए एक बदलाव का दौर था। जब बाहरी खतरे कम हुए, तो उन्होंने मेवाड़ की पहचान को केवल एक किले के रूप में नहीं, बल्कि एक कलात्मक केंद्र के रूप में विकसित करना शुरू किया।
सहेलियों की बाड़ी उनके इसी विजन का हिस्सा थी। यह केवल एक बगीचा नहीं, बल्कि शहर की जल-प्रबंधन प्रणाली का एक अभिन्न अंग था। यह उस दौर का 'पीस डिविडेंड' था, जिसे संगमरमर और बहते पानी के जरिए अमर कर दिया गया।
वह बाड़ी जहाँ राजा का प्रवेश वर्जित था
संग्राम सिंह द्वितीय के सामने एक चुनौती थी। मेवाड़ की विरासत बलिदानों से बनी थी, लेकिन 1710 तक मुगल साम्राज्य बिखरने लगा था। शांति का समय आया तो उन्होंने अपनी संपत्ति का निवेश एक ऐसी जगह किया, जो केवल सुकून के लिए थी। यह बाड़ी रानी और उनकी सहेलियों का एकांत था, जहाँ तीज-त्यौहार मनाए जाते थे और मानसून की फुहारों की कल्पना को हकीकत में बदला जाता था।
यहाँ की इंजीनियरिंग किसी जादू से कम नहीं। 'बिन बादल बरसात' वाले आंगन में संगमरमरी मूर्तियाँ पानी के पात्र लिए खड़ी हैं, जिनसे गिरती फुहारें तपती गर्मी में भी ठंडक का एहसास कराती हैं। उन्होंने इसे मुगल उद्यान शैली और मेवाड़ी नक्काशी के मेल से तैयार किया था। यह निर्माण एक राजा का अपनी रानियों को दिया गया एक ऐसा उपहार था, जिसमें राजा खुद का कोई हस्तक्षेप नहीं चाहता था।
संग्राम सिंह द्वितीय का निधन 1734 के आसपास हुआ। उसके कुछ ही समय बाद मराठा आक्रमणों ने उदयपुर की शांति को फिर से हिला दिया। यह बाड़ी उन हमलों से कैसे बची, यह एक अनसुलझा रहस्य है। लेकिन यह जगह मराठों, अंग्रेजों और समय के तमाम थपेड़ों के बावजूद आज भी उसी तरह खड़ी है—एक ऐसी जगह जहाँ राजा की सत्ता नहीं, बल्कि महिलाओं की मौज-मस्ती का राज था।
युद्ध से शांति की ओर
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06 अक्सर पूछे जाने वाले।
सहेलियों की बाड़ी के बारे में यात्री जो सवाल हमें सबसे ज़्यादा भेजते हैं।
क्या सहेलियों की बाड़ी जाना सार्थक है?
बिल्कुल, खासकर यदि आप वास्तुकला और इंजीनियरिंग की बारीकियों में रुचि रखते हैं। यहाँ के फव्वारे बिना किसी मोटर या पंप के, पूरी तरह गुरुत्वाकर्षण (gravity) के सिद्धांत पर चलते हैं। फतेह सागर झील से पानी को भूमिगत नहरों के जरिए यहाँ तक पहुँचाया गया है। तीन सदी पुरानी यह तकनीक आज भी वैसे ही काम करती है। कमल के तालाब, संगमरमर के हाथी और एक अलग ही सुकून भरा वातावरण इसे उदयपुर की अन्य जगहों से अलग बनाता है।
सहेलियों की बाड़ी घूमने में कितना समय लगता है?
ज्यादातर लोग यहाँ 45 मिनट से एक घंटा बिताते हैं, जो चारों चौकों और छोटे संग्रहालय को देखने के लिए पर्याप्त है। यदि आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो 20-30 मिनट अतिरिक्त रखें। पक्षियों की चोंच से गिरता पानी और 'रंग महल' में कांच से छनकर आती रोशनी के खेल को गौर से देखने के लिए धैर्य चाहिए। स्थानीय लोग अक्सर कहते हैं कि जो पर्यटक इसे 20 मिनट में भागकर देख लेते हैं, उन्होंने असल में उदयपुर देखा ही नहीं।
उदयपुर शहर के केंद्र से सहेलियों की बाड़ी कैसे पहुँचें?
सिटी पैलेस क्षेत्र से ऑटो-रिक्शा आपको 10-15 मिनट में यहाँ पहुँचा देगा, जिसका किराया ₹60 से ₹100 के बीच होना चाहिए; बैठने से पहले मोलभाव जरूर कर लें। यह बाड़ी शहर के उत्तरी छोर पर फतेह सागर झील के पास स्थित है। आप ओला या उबर का उपयोग भी कर सकते हैं। यदि आप फतेह सागर की पाल पर टहल रहे हैं, तो यहाँ का प्रवेश द्वार पैदल दूरी पर ही है।
सहेलियों की बाड़ी जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?
सुबह 9 बजे का समय सबसे अच्छा है, जब धूप संगमरमर की नक्काशी पर कोमल होती है और भीड़ कम रहती है। अक्टूबर से मार्च तक का मौसम घूमने के लिए सबसे सुखद है। एक और विकल्प है—मानसून (जुलाई-सितंबर), जब फव्वारे पूरे दबाव के साथ चलते हैं और बाग हरियाली से लथपथ होता है, हालांकि रास्ते थोड़े फिसलन भरे हो सकते हैं।
सहेलियों की बाड़ी का प्रवेश शुल्क क्या है?
प्रवेश शुल्क काफी मामूली है—भारतीयों के लिए ₹10 से ₹30 और विदेशियों के लिए ₹50 से ₹150 के बीच, हालांकि यह समय-समय पर बदल सकता है। टिकट केवल गेट पर ही उपलब्ध हैं, ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा नहीं है। मोबाइल से फोटो खींचना मुफ्त है, लेकिन प्रोफेशनल कैमरों के लिए ₹20-50 का अतिरिक्त शुल्क लग सकता है।
सहेलियों की बाड़ी में क्या देखना न भूलें?
यहाँ का 'बिन बादल बरसात' चौक जरूर देखें, जहाँ फव्वारे फुहारें छोड़कर कृत्रिम बारिश का अहसास कराते हैं। 'रंग महल' में रंगीन कांच की खिड़कियों से पानी पर पड़ती रोशनी का खेल देखना न भूलें—दोपहर बाद यहाँ का नज़ारा सबसे सुंदर होता है। इसके अलावा, सावन-भादो मंडप में पक्षियों की मूर्तियों को ध्यान से देखें; हर नक्काशीदार चोंच से पानी गिरने का तरीका अलग है।
सहेलियों की बाड़ी किसने और क्यों बनवाई थी?
इसे 18वीं सदी में महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय ने रानी और उनकी सहेलियों के लिए एक निजी विश्राम स्थल के रूप में बनवाया था। 'सहेलियाँ' शब्द का अर्थ यहाँ दासियों से नहीं, बल्कि शाही महिलाओं की कुलीन सखियों से है। यह जगह मेवाड़ के उस दौर की गवाह है जब युद्धों से शांति मिलने के बाद कला और मनोरंजन पर ध्यान दिया गया। यह राजस्थान की चुनिंदा जगहों में से है जो विशेष रूप से महिलाओं के निजी अवकाश और उत्सवों के लिए बनाई गई थी।
सत्यापित, और दिखाया गया।
Audiala संपादकीय टीम द्वारा ऐतिहासिक अभिलेखों, स्थापत्य अभिलेखागारों और स्थानीय विशेषज्ञता से शोधित और लिखित।
आधिकारिक राज्य पर्यटन पोर्टल जो बगीचे के निर्माता (संग्राम सिंह द्वितीय), उदयपुर के मुख्य आकर्षण के रूप में इसकी स्थिति और बुनियादी आगंतुक जानकारी की पुष्टि करता है।
भारत सरकार का पर्यटन पृष्ठ जो फतेह सागर झील से गुरुत्वाकर्षण-आधारित फव्वारों, 18वीं सदी के निर्माण की तारीख और वर्षा फव्वारे की विशेषता के बारे में प्रमुख इंजीनियरिंग विवरण प्रदान करता है।
आधिकारिक हाउस ऑफ मेवाड़ विरासत स्रोत जो सहेलियों की बाड़ी को संग्राम सिंह द्वितीय के स्थापत्य कार्यों में सूचीबद्ध करता है और वंशवादी संदर्भ प्रदान करता है।
संग्राम सिंह द्वितीय के शासनकाल और स्थापत्य संरक्षण पर अतिरिक्त मेवाड़ विरासत संदर्भ।
द्वितीयक यात्रा स्रोत जो तालाबों के नाम (सावन भादो, कमल तलाई, रंग महल, बिन बादल बरसात), लेआउट विवरण और अंग्रेजी-आयातित वर्षा फव्वारों के बारे में अपुष्ट दावे प्रदान करता है।
यात्रा ब्लॉग जो स्थापत्य सामग्री विवरण, मौसमी बदलाव के नोट्स और बगीचे के लेआउट का विवरण प्रदान करता है।
स्थानीय होटल गाइड जिसमें बगीचे का आकार (~6 एकड़), खुलने का समय, प्रवेश शुल्क और मौसमी यात्रा सलाह दी गई है।
एग्रीगेटेड आगंतुक समीक्षाएं और स्थानीय सुझाव, जिसमें ऑटो-रिक्शा द्वारा अधिक शुल्क लेने और आसपास के आकर्षणों के बारे में सुरक्षा चेतावनी शामिल है।
अंतिम समीक्षा: