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रावत किला
रावलपिंडी·पाकिस्तान·33° N · 73° E·अपडेट किया गया Apr 2026
रावल्पिंडी से पूर्व में स्थित रावत किला ग्रांड ट्रंक रोड की एक ऐसी सराय है जिसने समय के साथ खुद को एक किले में ढाल लिया। इसकी पुरानी दीवारों में 1500 के दशक के युद्धों की अनकही दास्तान आज भी दफन है।
रावत किला पहुँचते ही ऐसा महसूस होता है जैसे समय अभी भी उन पुराने काफिलों की धूल में अटका हुआ है। रावलपिंडी से करीब 17-18 किलोमीटर दूर ग्रैंड ट्रंक रोड पर खड़ा यह ढांचा महज़ एक खंडहर नहीं, बल्कि उन दिनों की गवाही है जब सरायें सिर्फ ठहरने की जगह नहीं, बल्कि सुरक्षा और साज़िशों के केंद्र हुआ करती थीं। यहाँ कोई शाही भव्यता नहीं है, पर पत्थरों की खुरदरी बनावट में वह कड़वा सच दर्ज है कि इतिहास अक्सर तलवारों की नोक पर लिखा जाता था।
पुरातत्व विभाग के अनुसार, इस सराय-किले की नींव 15वीं सदी की शुरुआत में पड़ी थी। यह वह दौर था जब पंजाब के मैदानों से कश्मीर और उत्तर-पश्चिम की ओर जाने वाला हर व्यापारी और सिपाही इसी रास्ते से गुजरता था। नाम का मूल अरबी शब्द 'रिबात' है, जिसका अर्थ ही है यात्रियों का पड़ाव। यहाँ की दीवारों को देखकर साफ पता चलता है कि यह जगह एक साथ स्वागत और चेतावनी दोनों देती थी।
रावत किला उन लोगों के लिए है जो इतिहास को उसके कच्चे रूप में देखना पसंद करते हैं। यहाँ का आँगन कभी व्यापारियों और उनके जानवरों की चहल-पहल से भरा होता था, लेकिन मजबूत दीवारें बताती हैं कि यहाँ मेहमाननवाज़ी के साथ-साथ हमेशा हथियारों पर हाथ रहता था। यह जगह आज भी अपनी दोहरी पहचान लिए खड़ी है—एक ओर सराय की सादगी, दूसरी ओर किलेबंदी की सख्ती।
वर्तमान में किले का संरक्षण कार्य चल रहा है, जो इसे और भी दिलचस्प बनाता है। कहीं दीवारें नई ईंटों से संवरी हैं, तो कहीं सदियों पुराना पत्थर अपनी जर्जर अवस्था में है। यहाँ मरम्मत का काम 2017 से शुरू हुआ और फरवरी 2025 तक जारी है। यह कोई पॉलिश किया हुआ स्मारक नहीं, बल्कि एक ऐसा पन्ना है जिसे इतिहासकार आज भी सहेज रहे हैं।
Audiala संपादकीय टीम द्वारा ऐतिहासिक अभिलेखों, स्थापत्य अभिलेखागारों और स्थानीय विशेषज्ञता से शोधित।
क्या देखें
मुख्य द्वार और बाहरी दीवारें
रावत किला को बाहर से देखना ही इसे समझने का सबसे बेहतर तरीका है। इसके उत्तर और पूर्व में बने विशाल द्वार आज भी उस दौर की सख्ती की गवाही देते हैं, जब यहाँ आने-जाने वालों की कड़ी निगरानी होती थी। पत्थर की मजबूत दीवारें इस सराय को एक सुरक्षित घेरे में बदल देती हैं। कुछ पल यहाँ ठहरें, तो आप कल्पना कर सकते हैं कि कैसे शाम ढलते ही यहाँ घोड़ों की टापें और थके-हारे मुसाफिरों की चहल-पहल गूंजती होगी, जो रात के अंधेरे में अनजान रास्तों पर भरोसा करने से बचते थे।
पुरानी सराय का आंगन
किले के भीतर कदम रखते ही, आपको एक शाही महल के बजाय एक पुरानी सराय का अहसास होगा। लगभग 10,000 वर्ग मीटर के इस खुले आंगन के चारों ओर बनी छोटी कोठरियां कभी व्यापारियों का ठिकाना हुआ करती थीं। 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ कभी 45 कोठरियां थीं, जिनमें से अब केवल 19 बची हैं। यहाँ की वास्तुकला दिखावे के लिए नहीं, बल्कि जरूरत के लिए थी—जहाँ पशुओं को बांधा जाता था, सामान उतारा जाता था और शायद चूल्हों का धुआं आसमान की ओर उठता होगा।
सुल्तान सारंग खान का मकबरा और इतिहास का बोझ
रावत किला का भावनात्मक केंद्र सुल्तान सारंग खान का मकबरा है। 1893-94 के रावलपिंडी गजट के अनुसार, यह मकबरा 16वीं सदी के मध्य में उनके और उनके 16 पुत्रों की शहादत के बाद बनवाया गया था। जब आप इस मकबरे के पास खड़े होते हैं, तो यह जगह महज एक पत्थर की इमारत नहीं रह जाती। यह एक ऐसे इतिहास का गवाह बन जाती है जहाँ स्थानीय सत्ता का अंत हुआ और एक ऐसी गाथा लिखी गई जिसे सदियों से याद किया जा रहा है।
अपनी यात्रा की योजना बनाएं
कैसे पहुँचें
रावत किला रावलपिंडी से करीब 17-18 किलोमीटर पूर्व में ग्रैंड ट्रंक रोड पर स्थित है। रावलपिंडी से यहाँ तक पहुँचने के लिए सबसे आसान तरीका अपनी कार या कैब है, जिसमें ट्रैफिक के हिसाब से 30 से 45 मिनट लग सकते हैं। अगर आप सार्वजनिक बस ले रहे हैं, तो रावत बस स्टॉप पर उतरें; यहाँ से किले तक पहुँचने के लिए पैदल चलने के बजाय रिक्शा लेना बेहतर है, क्योंकि जीटी रोड पर धूल और तेज रफ्तार ट्रैफिक रहता है।
खुलने का समय
फिलहाल किले के खुलने का कोई आधिकारिक समय निर्धारित नहीं है। 2017 से यहाँ रुक-रुक कर संरक्षण का काम चल रहा है, जो फरवरी 2025 में भी जारी था। इसलिए बेहतर यही है कि आप दिन के उजाले में जाएँ और जाने से पहले स्थानीय स्तर पर या पुरातत्व विभाग (DOAM) से स्थिति की पुष्टि कर लें।
कितना समय लगेगा
अगर आप सिर्फ प्रवेश द्वार, आंगन और किले के ढांचे को देखना चाहते हैं, तो 30 से 45 मिनट पर्याप्त हैं। लेकिन अगर आप पत्थरों की कारीगरी, ढलती धूप में दीवारों के बदलते रंग और 16वीं सदी में सुल्तान सारंग खान के बलिदान की कहानियों को महसूस करना चाहते हैं, तो एक से डेढ़ घंटा बिताएं।
सुगम्यता
यहाँ व्हीलचेयर के लिए कोई सुविधा नहीं है। जमीन ऊबड़-खाबड़ है, पत्थर घिस चुके हैं और जीर्णोद्धार के काम के कारण जगह-जगह अवरोध हो सकते हैं। यहाँ चलने के लिए सहजता से अधिक सावधानी की जरूरत है, इसलिए एक मजबूत लाठी साथ रखना मददगार साबित हो सकता है।
फोटो गैलरी
रावत किला की प्राचीन पत्थर की दीवारें और मेहराबदार प्रवेश द्वार रावलपिंडी, पाकिस्तान के समृद्ध इतिहास के प्रमाण के रूप में खड़े हैं। · Faizan Sabriऐतिहासिक रावत किला, रावलपिंडी, पाकिस्तान में स्मारक संगमरमर की पट्टिका का विस्तृत दृश्य, जिसमें पारंपरिक उर्दू शिलालेख प्रदर्शित है। · Omarjhawarianरावत किला की प्राचीन पत्थर की वास्तुकला का एक दृश्य, जो रावलपिंडी, पाकिस्तान में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। · Faizan Sabriरावत किला का प्राचीन पत्थर का प्रवेश द्वार रावलपिंडी, पाकिस्तान के समृद्ध इतिहास के प्रमाण के रूप में खड़ा है। · Faizan Sabriरावत किला की प्राचीन पत्थर की संरचनाएं रावलपिंडी, पाकिस्तान के समृद्ध इतिहास के प्रमाण के रूप में, एक चमकीले, धूप वाले आसमान के नीचे खड़ी हैं। · Faizan Sabriरावत किला, रावलपिंडी, पाकिस्तान की प्राचीन पत्थर की संरचनाओं में पारंपरिक मेहराबदार द्वार और एक केंद्रीय आंगन के चारों ओर रक्षात्मक दीवारें हैं। · Faizan Sabriरावत किला का प्राचीन पत्थर का प्रवेश द्वार आधुनिक दैनिक जीवन से घिरा हुआ, रावलपिंडी, पाकिस्तान के समृद्ध इतिहास के प्रमाण के रूप में खड़ा है। · Khubayb303
इतिहास
एक सराय जिसे लड़ना पड़ा
रावत किला मूलतः एक सराय के रूप में शुरू हुआ था, जो इस व्यस्त मार्ग पर यात्रियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना था। 15वीं सदी की यह संरचना वक्त के साथ एक सैन्य किले में ढल गई।
कुछ स्थानीय परंपराएं इसे 1036 या 1039 ईस्वी में गजनी के महमूद के बेटे मसूद से जोड़ती हैं, लेकिन ये दावे किसी पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण पर टिके नहीं हैं। फिर भी, यह अनिश्चितता यह दर्शाती है कि यह जगह सदियों से लोगों के जेहन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज रही है।
वह मोड़
सुल्तान सारंग खान की आखिरी जंग
रावत किले की रूह यहाँ के मकबरे में बसती है, जो सुल्तान सारंग खान और उनके बेटों की याद दिलाता है। 16वीं सदी के मध्य में, जब सूरी शासकों का प्रभाव बढ़ रहा था, सारंग खान ने उन्हें टक्कर दी। 1546 ईस्वी में हुई उस जंग में न केवल सुल्तान, बल्कि उनके बेटे भी मारे गए। लोक कथाओं में बेटों की संख्या 16 बताई जाती है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड इसे 12-13 मानते हैं। यह विरोधाभास ही इस कहानी को जीवंत रखता है।
इतिहासकार अब इस बात पर सहमत हैं कि सारंग खान की लड़ाई शेरशाह सूरी से नहीं, बल्कि उसके बेटे इस्लाम शाह सूरी से हुई थी। शेरशाह का निधन 1545 में ही हो गया था, इसलिए 1546 की लड़ाई का यह संदर्भ कहीं अधिक सटीक बैठता है।
कहा जाता है कि सारंग खान के भाई, आदम खान ने ही बाद में उनके और उनके बेटों के शवों को सम्मानपूर्वक यहाँ दफनाया और यह मकबरा बनवाया। यह सिर्फ एक युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि एक परिवार के अंत और उनके बलिदान की गाथा है जो आज भी उन खामोश पत्थरों में गूँजती है।
ग्रैंड ट्रंक रोड की रसद
ग्रैंड ट्रंक रोड का भूगोल ही रावत की नियति तय करता था। यह मार्ग सिर्फ व्यापार का जरिया नहीं था, बल्कि सेनाओं की आवाजाही का मुख्य गलियारा था। इसीलिए यहाँ एक ऐसी सराय की जरूरत थी जो यात्रियों को पनाह भी दे सके और जरूरत पड़ने पर एक सैन्य चौकी में भी तब्दील हो जाए। यहाँ की 93.5 x 106.3 मीटर की चारदीवारी इसी रणनीति का हिस्सा थी।
मरम्मत के दौर से गुजरता इतिहास
किले का वर्तमान स्वरूप किसी ठहरी हुई तस्वीर की तरह नहीं है। अतिक्रमण और देखरेख के अभाव ने इसे काफी नुकसान पहुँचाया है। 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक, कभी यहाँ 45 कमरे हुआ करते थे, जिनमें से अब केवल 19 ही बचे हैं। मार्च 2024 और फरवरी 2025 में हुए सरकारी हस्तक्षेप बताते हैं कि इसे फिर से जीवित करने की कोशिशें अभी भी जारी हैं।
आगंतुकों के लिए सुझाव
जल्दी पहुँचें
सुबह जल्दी या देर दोपहर में यहाँ पहुँचें। उस समय की तिरछी धूप पुराने पत्थरों पर पड़ती है तो उनकी बनावट खुलकर सामने आती है। भरी दोपहर में रावत की गर्मी किसी जलते हुए इंजन के पास खड़े होने जैसी महसूस हो सकती है।
वाइड एंगल फोटो
अपने कैमरे में वाइड-एंगल लेंस का इस्तेमाल करें। रावत को एक इमारत के तौर पर नहीं, बल्कि एक पुराने कारवां-सराय यानी मुसाफिरखाने के तौर पर देखें। वाइड शॉट से ही आप किले के आंगन और उसकी चतुष्कोणीय ज्यामिति को एक फ्रेम में समेट पाएंगे।
बंद हिस्सों का ध्यान रखें
किले में चल रहा संरक्षण कार्य अब यहाँ की पहचान बन चुका है। अगर कोई हिस्सा घेरे में है या दरवाजा बंद है, तो अंदर जाने की जिद न करें। काम की वजह से यहाँ का एक्सेस अक्सर बदलता रहता है।
आस-पास के आकर्षण
रावत किले को एक दिन की बड़ी यात्रा न बनाएं, बल्कि इसे जीटी रोड पर एक छोटे पड़ाव की तरह रखें। यहाँ से करीब 7 किलोमीटर दूर मणिकियाला स्तूप भी है, जिसे आप किले की छत से दूरबीन से देख सकते हैं। दोनों को एक ही दिन में कवर करना ज्यादा तर्कसंगत है।
भोजन की व्यवस्था
किले के अंदर किसी कैफे या रेस्टोरेंट की उम्मीद न रखें। यह एक पुरानी सराय है जहाँ सुविधाएं नहीं बची हैं। खाने के लिए रावत टाउन की स्थानीय दुकानों या वापस रावलपिंडी की ओर रुख करना ही समझदारी है।
इतिहास को परखें
वहाँ लगे बोर्ड की जानकारी जरूर पढ़ें, लेकिन इतिहास को लेकर थोड़ा सतर्क रहें। महमूद गजनवी के बेटे मसूद से जुड़े दावों की तिथियों में विरोधाभास है, जबकि 15वीं सदी के सुल्तानत काल की सराय और 16वीं सदी के गक्खर कालीन किलेबंदी के प्रमाण अधिक पुख्ता हैं।
कहाँ खाएं
local_dining
इन्हें चखे बिना न जाएं
शिनवारी कड़ाही (मटन या चिकन) — रावत क्षेत्र का सिग्नेचर व्यंजन, जिसे टमाटर और मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है।नमकीन कड़ाही — पश्तून रेस्तरां में लोकप्रिय एक मसालेदार, नमकीन संस्करण।चपली कबाब — जड़ी-बूटियों और बेसन के साथ चपटा, मसालेदार अफगान-शैली का कबाब।दुम्बा टिक्का — सीखों पर भुने हुए कोमल मेमने के टुकड़े, एक पश्तून विशेषता।ग्रिल्ड मछली — देसी पारिवारिक रेस्तरां में एक उत्कृष्ट व्यंजन, विशेष रूप से ताजी नदी की मछली।मलाई बोटी — मलाईदार, मैरीनेट किए हुए मांस के टुकड़े, अक्सर ऐपेटाइज़र के रूप में परोसे जाते हैं।सीख कबाब — सीखों पर ढाला गया और कोयले पर भुना हुआ कीमा बनाया हुआ मांस।अफगानी रोटी — मांस के व्यंजनों के साथ परोसी जाने वाली मोटी, मक्खन वाली फ्लैटब्रेड।
Al-Kausar Sweets & Bakers
local favorite
Bakery & Sweets€€star4.8(142)
ऑर्डर करें: ताज़ा नान, पारंपरिक पाकिस्तानी मिठाइयाँ, और गर्म रोटी के साथ सुबह की चाय — स्थानीय लोग किले के रास्ते में यहाँ रुकते हैं।
यह सत्यापित डेटा (142 समीक्षाएं) में सबसे अधिक समीक्षा की गई जगह है और सीधे GT Road पर स्थित है, जो इसे वास्तविक पड़ोस का केंद्र बनाती है। यहाँ पर्यटक नहीं, बल्कि स्थानीय लोग खाते हैं।
ऑर्डर करें: मसालेदार डिपिंग सॉस के साथ स्टीम्ड मोमोज — क्षेत्र में हावी भारी कड़ाही वाले रेस्तरां के लिए एक हल्का, संतोषजनक विकल्प।
परफेक्ट 5.0 रेटिंग और शिनवारी-प्रधान भोजन दृश्य से एक ताज़ा ब्रेक। यह एक वास्तविक पड़ोस का रत्न है जो कुछ अलग तलाशने वाले स्थानीय लोगों को पूरा करता है।
ऑर्डर करें: ग्रिल्ड चिकन — सीधा, बिना तामझाम वाला, और किले से पहले या बाद में त्वरित दोपहर के भोजन के लिए किफायती।
एक बिना किसी दिखावे वाली स्थानीय जगह जहाँ निर्माण श्रमिक और किले के आगंतुक प्रोटीन प्राप्त करते हैं। यह प्रामाणिक पड़ोस का भोजन है, जो बाहरी लोगों के लिए नहीं बनाया गया है, और यही कारण है कि यह काम करता है।
checkरावत का खान-पान ढाबा और सड़क किनारे केंद्रित है — पॉलिश किए हुए डाइनिंग रूम के बजाय आकस्मिक, बिना तामझाम वाले वातावरण की अपेक्षा करें।
checkइस क्षेत्र के अधिकांश रेस्तरां देर रात तक खुले रहते हैं, जो राजमार्ग के यातायात और शाम की भीड़ को पूरा करते हैं।
checkनकद भुगतान मानक है; छोटी जगहों पर ऑर्डर करने से पहले कार्ड भुगतान विकल्पों की पुष्टि करें।
checkT-Chowk क्षेत्र (GT Road जंक्शन) रावत किला के पास मुख्य भोजन केंद्र है; अधिकांश रेस्तरां रिक्शा की छोटी दूरी के भीतर हैं।
checkदोपहर के भोजन की भीड़ आमतौर पर दोपहर 1-3 बजे होती है; रात के खाने की भीड़ शाम 7 बजे के बाद चरम पर होती है, विशेष रूप से सप्ताहांत पर।
फूड डिस्ट्रिक्ट:T-Chowk Rawat — the main eating cluster on GT Road with multiple Shinwari and karahi restaurantsRawat Bazaar — local market with everyday shopping; more functional than food-focusedCentral Rawalpindi (Raja Bazaar / Rawalpindi Food Street) — if you want a true food-market experience, venture into the city proper for more variety and street food stalls
रेस्तरां डेटा Google द्वारा प्रदान
अक्सर पूछे जाने वाले।
क्या रावत किला देखने लायक है?
हाँ, अगर आपको ऐसी जगहें पसंद हैं जो आधी सराय और आधा रणक्षेत्र लगती हों, तो यहाँ जरूर आएं। यह किला मूल रूप से ग्रांड ट्रंक रोड पर एक कारवां-सराय था, जिसे बाद में किले में बदल दिया गया। इसी वजह से इसमें अन्य पहाड़ी किलों की तुलना में एक अलग ही गहराई और परतों वाली बनावट दिखती है। यहाँ किसी सजे-धजे म्यूजियम की उम्मीद न करें; यहाँ का इतिहास और माहौल ही इसकी असली जान है।
रावत किला घूमने में कितना समय लगेगा?
ज्यादातर सैलानियों को यहाँ करीब 45 मिनट से 1 घंटे का समय लगता है। इतने समय में आप पूरे परिसर में घूम सकते हैं, बची हुई दीवारों और द्वारों को देख सकते हैं और सुल्तान सारंग खान के मकबरे पर कुछ पल ठहर सकते हैं। अगर आपको ढलती दोपहर की रोशनी में पुरानी ईंटों और पत्थरों की फोटोग्राफी का शौक है, तो थोड़ा ज्यादा समय निकालें।
रावत किले का इतिहास क्या है?
इसे सबसे सटीक रूप से 15वीं सदी की एक सराय माना जाता है, जिसे 16वीं सदी में किले का रूप दिया गया। यह ग्रांड ट्रंक रोड के उस गलियारे पर स्थित है जहाँ कभी व्यापारियों, सैनिकों और संदेशवाहकों का तांता लगा रहता था। 1540 के दशक में यहाँ भीषण युद्ध हुआ था, जिसमें सुल्तान सारंग खान घक्कर वीरगति को प्राप्त हुए थे, हालांकि इतिहासकार उनके दुश्मन के नाम को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं।
रावत किला किसने बनवाया था?
पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग के अनुसार, यह संरचना 15वीं सदी के सल्तनत काल की है। हालांकि एक स्थानीय मान्यता इसे महमूद गजनवी के पुत्र मसूद से जोड़ती है (1036-1039 ईस्वी), लेकिन यह दावों की पुष्टि के लिए ठोस सबूत नहीं मिलते। सुरक्षित निष्कर्ष यही है कि यहां पुरानी नींव रही होगी, लेकिन वर्तमान ढांचा बाद के दौर में तैयार हुआ।
क्या रावत किला यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है?
नहीं, यह यूनेस्को की सूची या पाकिस्तान की संभावित सूची में शामिल नहीं है। अच्छी बात यह है कि बिना किसी वैश्विक ठप्पे के भी इस जगह का अपना भारी-भरकम ऐतिहासिक वजूद है। यह स्थल ग्लोबल ब्रांडिंग से कहीं ज्यादा स्थानीय स्मृतियों, पुरातात्विक अवशेषों और हालिया संरक्षण कार्यों के जरिए पहचाना जाता है।
रावत किले में क्या देखने लायक है?
यहाँ आप एक किलेबंद सराय का ढांचा, भारी-भरकम पुरानी चिनाई और सुल्तान सारंग खान से जुड़ा मकबरा देख सकते हैं। इसकी खूबसूरती स्पर्श में है—धूप में तपते पुराने पत्थर और टूटे हुए किनारे। जब आप यहाँ खड़े होते हैं, तो कल्पना कर सकते हैं कि जहाँ आज गाड़ियाँ शोर मचा रही हैं, वहाँ कभी ऊंटों के कारवां विश्राम किया करते थे।
क्या किले में अभी भी मरम्मत का काम चल रहा है?
जी हाँ, 2017 से फरवरी 2025 तक यहाँ संरक्षण का काम जारी है। इसका मतलब है कि आपको किले के कुछ हिस्से पुरानी तस्वीरों की तुलना में अधिक स्थिर और साफ दिख सकते हैं। काम चलने के कारण स्थिति कभी भी बदल सकती है, इसलिए उम्मीदें संतुलित रखें और लचीला समय लेकर चलें।
स्रोत13
Audiala संपादकीय टीम द्वारा ऐतिहासिक अभिलेखों, स्थापत्य अभिलेखागारों और स्थानीय विशेषज्ञता से शोधित और लिखित। अंतिम अपडेट: April 2026.
UNESCO World Heritage Centre - Pakistan — पाकिस्तान की सूचीबद्ध और संभावित स्थलों की पुष्टि करने और यह सत्यापित करने के लिए उपयोग किया गया कि Rawat Fort का नाम इसमें शामिल नहीं है।
सहेजी और हाल में पढ़ी जगहें — सिर्फ़ इसी डिवाइस पर।
फ़ोटो क्रेडिट (13)
Rawat Fort - Main Gate East — Mudabbirmaajid — CC BY-SA 3.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/3.0/) — स्रोत: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Rawat_Fort_-_Main_Gate_East.jpg
Entrance Of Rawat Fort — Khubayb303 — CC BY-SA 4.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0/) — स्रोत: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Entrance_Of_Rawat_Fort.jpg
A tomb in Rawat Fort — Faizan Sabri — CC BY-SA 4.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0/) — स्रोत: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:A_tomb_in_Rawat_Fort.jpg
Inside Rawat Fort — Faizan Sabri — CC BY-SA 4.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0/) — स्रोत: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Inside_Rawat_Fort.jpg
Rawat Fort - Exterior Wall, North side — Mudabbirmaajid — CC BY-SA 3.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/3.0/) — स्रोत: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Rawat_Fort_-_Exterior_Wall,_North_side.jpg
Aerial View of Islamabad From Rawat Fort — Faizan Sabri — CC BY-SA 4.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0/) — स्रोत: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Aerial_View_of_Islamabad_From_Rawat_Fort.jpg
Inside the Rawat Fort — Faizan Sabri — CC BY-SA 4.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0/) — स्रोत: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Inside_the_Rawat_Fort.jpg
Rawat Fort Gravestone of Sarang Khan Grave — Omarjhawarian — CC BY-SA 3.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/3.0/) — स्रोत: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Rawat_Fort_Gravestone_of_Sarang_Khan_Grave.jpg
Front Entrance of Rawat Fort — Faizan Sabri — CC BY-SA 4.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0/) — स्रोत: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Front_Entrance_of_Rawat_Fort.jpg
Inside View Rawat Fort — Faizan Sabri — CC BY-SA 4.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0/) — स्रोत: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Inside_View_Rawat_Fort.jpg
Rawat Fort - Eastern Gate from Inside 2 — Mudabbirmaajid — CC BY-SA 3.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/3.0/) — स्रोत: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Rawat_Fort_-_Eastern_Gate_from_Inside_2.jpg
Rawat Fort 5 — Mobeen ur Rehman — CC BY-SA 4.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0/) — स्रोत: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Rawat_Fort_5.jpg
Rawat Fort 2 — Mobeen ur Rehman — CC BY-SA 4.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0/) — स्रोत: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Rawat_Fort_2.jpg
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