प्रागैतिहासिक
person
c. 6000 BCE
नवपाषाण बसने वाले
काऊशुंग सिटी का मैदान पहले से ही नवपाषाण समुदायों का घर था। लिउहे और फेंगबितौ की पुरातात्विक परतें लगातार बसावट दिखाती हैं। यही आगे चलकर मकाताओ मैदानों के लोगों के पूर्वज बने, जिन्होंने बाद में इस खाड़ी का नाम तकाउ रखा।
मिंग काल
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1603
पहला लिखित उल्लेख
चेन दी की डोंग फान जी में तकाओ आइल का उल्लेख मिलता है। नाम टिक गया। बाँस के जंगलों ने इस द्वीप को उसका नाम दिया। तकाउ सदियों तक इस खाड़ी की पहचान बना रहा।
डच काल
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1624
डचों ने तकाउ पर कब्ज़ा किया
डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने टैंकोया बंदरगाह को विकसित किया। वे इसे टैंकोइया कहते थे। खाड़ी एक क्षेत्रीय व्यापारिक चौकी बन गई। बाटाविया से आने वाले जहाज़ यहाँ लंगर डालते थे।
छिंग काल
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1683
छिंग बंदरगाह
छिंग सेनाओं ने ताइवान को अपने अधीन कर लिया। काऊशुंग सिटी का बंदरगाह वितरण केंद्र के रूप में काम करता था। खाड़ी से अनाज और चीनी की ढुलाई होती थी। अधिकारियों ने बंदरगाह की सुविधाओं में सुधार किया।
संधि-बंदरगाह युग
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1858
संधि बंदरगाह
तकाओ को संधि-बंदरगाह के रूप में खोला गया। ब्रिटिश व्यापारी पहुँचे। वाणिज्य दूतावास बंदरगाह के ऊपर स्थित था। भाप के जहाज़ों ने समुद्री व्यापार बदल दिया।
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1879
ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास
टकाउ में वाणिज्य दूतावास खुला। वह सिज़ीवान खाड़ी के ऊपर स्थित था। यह इमारत औपनिवेशिक कालों से बची रही। आज यह आगंतुकों का स्वागत करती है।
जापानी काल
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1895
जापानी अधिग्रहण
जापान ने ताइवान पर कब्ज़ा किया। तकाउ, ताकाओ बन गया। बंदरगाह औद्योगिक युग में प्रवेश कर गया। रेलमार्ग बंदरगाह तक पहुँच गए।
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1920
नाम परिवर्तन
ताकाओ, काऊशुंग सिटी बन गया। शहर मछली पकड़ने से उद्योग की ओर मुड़ गया। बंदरगाह की क्रेनें बढ़ती गईं। गोदाम जलतट के किनारे पंक्तिबद्ध हो गए।
युद्धोत्तर काल
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1945
चीनी गणराज्य का बंदरगाह
चीनी गणराज्य ने नियंत्रण संभाला। काऊशुंग सिटी उभरकर सामने आया। युद्ध के बाद बंदरगाह फिर बनाया गया। कंटेनर टर्मिनल दिखाई देने लगे।
आधुनिक युग
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1979
काऊशुंग सिटी घटना
मानवाधिकार रैली को दबा दिया गया। इस घटना ने लोकतंत्रीकरण की दिशा तय की। आज इसे फॉर्मोसा घटना के रूप में याद किया जाता है। काऊशुंग सिटी ने ताइवान की राजनीति को आकार दिया।
समकालीन
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2000
पियर-2 का पुनः उपयोग
बंदरगाह के गोदामों को कला स्थलों में बदला गया। पियर-2 सांस्कृतिक जिला बन गया। कंटेनरों में प्रदर्शनियाँ लगने लगीं। काऊशुंग सिटी ने खुद को नए रूप में गढ़ा।
public
2009
विश्व खेल
काऊशुंग सिटी ने अंतरराष्ट्रीय खेलों की मेज़बानी की। स्टेडियम में सौर पैनलों का इस्तेमाल हुआ। काऊशुंग सिटी ने ताइवान का पैमाना दिखाया। खिलाड़ियों ने यहाँ मुकाबला किया।
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2014
गैस विस्फोट
औद्योगिक आपदा ने काऊशुंग सिटी को झकझोर दिया। 32 लोगों की मौत हुई, 321 घायल हुए। शहर ने आधारभूत ढाँचा फिर बनाया। बंदरगाह क्षेत्रों में सुरक्षा बेहतर हुई।
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2024
शताब्दी
काऊशुंग सिटी ने शहर के रूप में 100 वर्ष पूरे किए। बंदरगाह पर उत्सव आयोजित हुए। काऊशुंग सिटी आगे की ओर देख रहा है। जलतट अब संस्कृति का मंच है।