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Saksham Yadav
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201K
कोटाIndia 25° N · 75° E सत्यापित Apr 2026
कोटा के किशोर सागर झील के किनारे स्थित यह पार्क 20 करोड़ रुपये की लागत से बना है। इसे आगरा के कुशल कारीगरों ने तैयार किया है। 2013 में खुलने के बाद से अब तक यहाँ 25 लाख से ज्यादा लोग आ चुके हैं। प्रवेश शुल्क मात्र ₹20 है।
कोचिंग सेंटरों और औद्योगिक कारखानों के लिए पहचाने जाने वाले कोटा शहर ने जब किशोर सागर झील के किनारे ₹20 करोड़ की लागत से दुनिया के सात अजूबों की प्रतिकृतियां खड़ी कीं, तो यह एक साहसिक प्रयोग था। 1346 में बने इस ऐतिहासिक जलस्रोत के किनारे सात एकड़ में फैला 'सेवन वंडर्स पार्क' आज कोटा की एक ऐसी पहचान बन चुका है, जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दबाव के बीच छात्रों के लिए एक सुकून भरी जगह है। शाम ढलते ही जब रंगीन रोशनी में ये स्मारक नहाते हैं और झील के पानी में इनकी परछाइयाँ तैरती हैं, तो यह नजारा किसी कल्पना लोक जैसा लगता है।
यहाँ का अनुभव कुछ अजीब पर दिलचस्प है। जहाँ एक ओर संगमरमर से बना छोटा ताजमहल खड़ा है, वहीं दूसरी ओर फाइबरग्लास से बनी स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी हवा में खड़ी नजर आती है। एफिल टॉवर और गीज़ा के पिरामिड के बीच टहलते हुए आप एक क्षण में दुनिया के अलग-अलग कोनों की यात्रा कर लेते हैं। रात के समय जब ये सात अजूबे दूधिया और रंगीन रोशनी में चमकते हैं, तो किशोर सागर का शांत पानी इन्हें अपने भीतर समा लेता है।
दिसंबर 2013 में खुलने के बाद से यह पार्क न केवल पर्यटकों के लिए, बल्कि कोटा के निवासियों के लिए भी एक पसंदीदा जगह बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि इसी पार्क की सफलता से प्रेरित होकर दिल्ली में 'वेस्ट टू वंडर' पार्क का निर्माण हुआ। बॉलीवुड ने भी इसे पहचाना—2017 में 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' की शूटिंग के लिए जब पार्क को एक दिन के लिए बंद किया गया, तो यह कोटा का सबसे चर्चित दिन बन गया। आज यह पार्क उस शहर के लिए एक जरूरी 'प्रेशर वाल्व' है, जो अपनी पढ़ाई की भागदौड़ के लिए जाना जाता है।
Audiala ऑडियो गाइड
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इतिहास
कोटा कभी पर्यटन के नक्शे पर नहीं था। यहाँ की अर्थव्यवस्था कोचिंग सेंटरों और चंबल नदी के किनारे बसे रसायनों के कारखानों पर टिकी थी। ऐसे में ₹20 करोड़ खर्च करके सात अजूबों की प्रतिकृतियां बनाने का फैसला एक बड़ा जुआ था।
कोटा के शहरी सुधार न्यास (UIT) ने यह जोखिम उठाया और 18 महीने की कड़ी मेहनत के बाद 150 से ज्यादा कारीगरों ने इस पार्क को हकीकत में बदला।
वह मोड़
8 दिसंबर 2013 को जब राजस्थान के तत्कालीन शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल ने पार्क का उद्घाटन किया, तो कोटा ने पहली बार कुछ ऐसा देखा जो पहले कभी नहीं था। वास्तुकार अनूप बर्तारिया ने इन स्मारकों को केवल खड़ा नहीं किया, बल्कि इनके साथ विस्तृत जानकारी वाले बोर्ड भी लगाए ताकि आने वाले लोग इनके इतिहास को समझ सकें।
यहाँ की सबसे खास बात इसके कारीगर हैं। भरतपुर, धौलपुर और आगरा के कुशल शिल्पकारों को इस काम के लिए बुलाया गया था। दिलचस्प बात यह है कि ताजमहल की प्रतिकृति बनाने वाले कारीगरों में वे लोग भी शामिल थे, जिनकी जड़ें आगरा के उसी शहर से जुड़ी हैं जहाँ असली ताजमहल खड़ा है। एक कोचिंग हब में बैठकर उन्होंने अपनी कला का जो नमूना पेश किया, वह आज भी लोगों को हैरान करता है।
यूआईटी (UIT) का यह ₹20 करोड़ का निवेश उम्मीद से कहीं ज्यादा सफल रहा। जहाँ दिल्ली जैसे महानगरों ने बाद में कचरे से कलाकृतियाँ बनाने का विचार अपनाया, वहीं कोटा ने पत्थर, संगमरमर और लोहे के साथ जो 'ओरिजिनल' नींव रखी, वह आज भी अपनी जगह कायम है।
बिल्कुल, अगर आप कोटा में हैं तो यहाँ जरूर आएं। मात्र ₹20 का टिकट राजस्थान में शायद ही आपको कहीं और इतना सस्ता मनोरंजन दे पाए। यहाँ बनी प्रतिकृतियाँ काफी बारीकी से बनाई गई हैं। किशोर सागर झील के किनारे होने के कारण रात में जब इनकी रोशनी पानी में चमकती है, तो ऐसा लगता है जैसे आप एक ही जगह पर पूरी दुनिया की सैर कर रहे हों।
पूरे पार्क को आराम से देखने के लिए 1 से 2 घंटे काफी हैं। शाम 6:00 बजे के आसपास पहुंचना सबसे सही रहता है, ताकि आप दिन की रोशनी और शाम की जगमगाहट दोनों देख सकें। शाम 7:00 बजे होने वाला म्यूजिकल फाउंटेन शो इस सैर का सबसे बेहतरीन समापन है।
भारतीय वयस्कों के लिए प्रवेश शुल्क ₹20 है, विदेशियों के लिए ₹40, और 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ₹5 से ₹10 के बीच है। कभी-कभी टिकट की कीमतों में बदलाव हो सकते हैं, इसलिए गेट पर काउंटर से पुष्टि करना हमेशा बेहतर होता है।
आम दिनों में यह पार्क दोपहर 2:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है। सप्ताहांत (वीकेंड) और छुट्टियों के दिन यह दोपहर 12:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुला रहता है। त्योहारों के दौरान समय बदल सकता है, इसलिए जाने से पहले स्थानीय स्तर पर जानकारी जरूर ले लें।
इस पार्क में ताजमहल, गीज़ा का महान पिरामिड, एफिल टॉवर, पीसा की झुकी हुई मीनार, क्राइस्ट द रिडीमर, कोलोसियम और स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की प्रतिकृतियां मौजूद हैं। हर स्मारक के पास एक सूचना बोर्ड लगा है, जो इसे सिर्फ एक सजावटी जगह के बजाय एक जानकारीपूर्ण अनुभव बनाता है।
हाँ, सूर्यास्त के बाद यह जगह फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन हो जाती है। किशोर सागर झील में ताजमहल और एफिल टॉवर की परछाई और रंगीन फ्लडलाइट्स कैमरे में बहुत खूबसूरत दिखती हैं। शाम 6:30 से 8:00 बजे के बीच का समय फोटो खींचने के लिए सबसे सटीक है।
जी हाँ, 2017 की बॉलीवुड फिल्म 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' की शूटिंग यहाँ हुई थी। फिल्म के दृश्यों में वरुण धवन और आलिया भट्ट यहाँ नजर आए थे। उस दिन शूट के लिए पार्क को आम जनता के लिए बंद रखा गया था, जिसने इस जगह को पूरे देश में पहचान दिलाने का काम किया।
कोटा जंक्शन से पार्क की दूरी लगभग 6-7.5 किलोमीटर है। स्टेशन के बाहर से ऑटो या टैक्सी लेकर आप 15-25 मिनट में यहाँ पहुंच सकते हैं। ड्राइवर को बस 'सात अजूबे पार्क' या 'किशोर सागर' बोलें, वे रास्ता अच्छी तरह जानते हैं।
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