प्राचीन शुरुआत
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c. 4000 BCE
झरनों के पास पहली आहट
लोग मत्क्वारी के खड़ी किनारों पर बस गए, जहाँ ज़मीन से गर्म गंधक वाला पानी फूटता था। सड़ी अंडे जैसी वही गंध अब भी नम सुबहों में अबानोतुबानी पर तैरती रहती है। उसी तापीय उपहार ने शहर की हर बाद की परत को आकार दिया।
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458 CE
वाख्तांग ने अपनी राजधानी बसाई
राजा वाख्तांग गोर्गासाली ने नारिकाला रिज पर पहला किला बनवाया। कथा है कि उनके शिकार का तीतर एक गर्म झरने में गिरा और तुरंत पक गया। उसी गंध ने उन्हें यक़ीन दिलाया कि जगह यही है। तिब्लिसी की शुरुआत एक शाही शिकारगाह के रूप में हुई, जो छोटा बने रहने को तैयार नहीं था।
मध्ययुगीन चौराहा
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627
बाइज़ंटाइन और ख़ज़र हमला
बाइज़ंटाइन और ख़ज़र सेनाओं के संयुक्त हमले में शहर जल उठा। चौराहे पर इसकी स्थिति वरदान भी थी और अभिशाप भी। जो भी साम्राज्य यहाँ से गुज़रा, वह इन द्वारों का मालिक बनना चाहता था।
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737
अरबी विजय और अमीरात
मरवान इब्न मुहम्मद ने शहर पर धावा बोला और लंबे अरबी शासन की नींव रखी। तिब्लिसी एक ऐसा अमीरात बना जो पहले दमिश्क, फिर बग़दाद को जवाब देता था। तीन सदियों तक अज़ान और गिरजाघर की घंटियाँ साथ सुनाई देती रहीं।
जॉर्जिया का स्वर्ण युग
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1122
डेविड द बिल्डर ने अपना शहर वापस लिया
राजा डेविड IV ने सेल्जुकों से तिब्लिसी छीनकर इसे एकीकृत जॉर्जिया की राजधानी बनाया। उन्होंने अपना दरबार यहाँ लाया और स्वर्ण युग की शुरुआत की। पहाड़ी पर खड़ा किला आज भी उस ईसाई राज्य की उनकी कल्पना सँभाले है जो काला सागर से कैस्पियन तक फैला था।
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c. 1186
रुस्तावेली ने 'नाइट' लिखा
शोता रुस्तावेली ने तिब्लिसी के जॉर्जियाई दरबार में 'द नाइट इन द पैंथर'ज़ स्किन' की रचना की। कविता के 1,600 चौपदियों ने एक परिष्कृत, सहिष्णु संसार का उत्सव मनाया, जो जल्द ही मिटने वाला था। उसकी प्रतियाँ अब भी उसी शहर में घूमती हैं जिसकी गलियों ने उसे प्रेरित किया।
मंगोल और तैमूरी आक्रमण
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1234
मंगोलों ने शहर ले लिया
मंगोलों की लहर तिब्लिसी की दीवारों पर टूट पड़ी। स्वर्ण युग धुएँ में खत्म हुआ। फिर भी शहर बचा रहा, दोबारा बना, और विजेताओं की एक और परत को अपने हठी स्वभाव में समो गया।
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1386
तैमूर की तबाही
तैमूर की सेना ने पूरे-के-पूरा मुहल्ले मलबे में बदल दिए। इतिहास-लेख बताते हैं कि गलियों में खून बहा। तिब्लिसी फिर संभल गया, जैसा वह हमेशा करता था, लेकिन हर हमले ने पत्थर को थोड़ा और गहरा और स्मृति को थोड़ा और पैना कर दिया।
फ़ारसी और रूसी शासन
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1795
फ़ारसी संहार
आगा मोहम्मद ख़ान की सेना ने 11 September को शहर पर धावा बोला। उन्होंने आग लगाई, हत्याएँ कीं और 15,000 बंदियों को गुलामी में ले गए। धुआँ छँटने पर मुश्किल से 20,000 लोग बचे थे। यह घाव अब भी जॉर्जियाई कविता में गूँजता है।
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1801
रूस ने जॉर्जिया को अपने में मिला लिया
ज़ार की सेना भीतर आ गई और बग्रातिद राजशाही को समाप्त कर दिया। तिब्लिसी कॉकसस वायसरॉयल्टी का प्रशासनिक केंद्र बन गया। पुराने लकड़ी के बालकनों के बगल में यूरोपीय नव-शास्त्रीय इमारतें उठने लगीं।
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1817
रूसी तिफ्लिस में बाराताशविली का जन्म
निकोलोज़ बाराताशविली ने ऐसी नगरी में जन्म लिया जो दो साम्राज्यों के बीच फँसी थी। उनकी रोमांटिक कविता जॉर्जिया की खोई स्वतंत्रता का शोक मनाती है, जबकि शहर की गलियाँ रूसी सैनिकों और यूरोपीय विचारों से भरती जा रही थीं।
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1851
इंपीरियल ओपेरा खुला
तिफ्लिस इंपीरियल थिएटर ने रुस्तावेली एवेन्यू पर अपने दरवाज़े खोले। इतालवी वास्तुकार, फ़्रांसीसी मंच मशीनरी और जॉर्जियाई आवाज़ों ने मिलकर कुछ अप्रत्याशित बनाया। इमारत आज भी खड़ी है, अब जॉर्जियन नेशनल ओपेरा के रूप में, जिसकी बालकनियों पर साम्राज्य और प्रतिरोध दोनों के भूत भारी हैं।
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1862
पिरोसमानी इस दुनिया में आए
निको पिरोसमानी का जन्म मिर्ज़ाआनी गाँव में ग़रीबी में हुआ, लेकिन उन्हें अपना कैनवस तिब्लिसी की मदिरा-सरायों में मिला। वे सीधे मेज़पोशों और दुकान के साइनबोर्डों पर चित्र बनाते थे। दावतों और जानवरों के उनके भोले लेकिन चमकते दृश्य आज भी अधिकांश आधिकारिक चित्रों से ज़्यादा सच्चे लगते हैं।
सोवियत सदी
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1918
स्वतंत्र गणराज्य की घोषणा
रूसी शासन के 117 वर्षों बाद जॉर्जिया ने 26 May को स्वतंत्रता की घोषणा की। तिब्लिसी आधुनिक जॉर्जियाई राज्य की पहली राजधानी बना। तीन छोटे वर्षों तक शहर ने खुली साँस ली, फिर अगला आक्रमण आ गया।
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1921
बोल्शेविकों ने धावा बोला
फरवरी में रेड आर्मी तिब्लिसी में दाख़िल हुई। लोकतांत्रिक गणराज्य गिर गया। सोवियत सत्ता ने शहर को ब्रूटलिस्ट स्मारकों, मेट्रो सुरंगों और अंतहीन कतारों से बदल दिया। फिर भी जॉर्जियाई संस्कृति रसोइयों, कविता पाठों और अडिग ठिठोलियों में बची रही।
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1956
मार्च नरसंहार
ख़्रुश्चेव द्वारा स्टालिन की आलोचना के विरोध में छात्र सड़कों पर उतर आए। 9 March को सोवियत सैनिकों ने गोली चलाई। दर्जनों लोग मारे गए। रुस्तावेली एवेन्यू पर बहा खून बता गया कि डी-स्टालिनाइज़ेशन की कीमत भी जॉर्जियाई जानों से चुकानी होगी।
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1966
मेट्रो खुली
तिब्लिसी की भूमिगत रेल 11 January को चलनी शुरू हुई। सोवियत इंजीनियरिंग और स्थानीय गर्व यहाँ मिले। झूमरों और मोज़ाइक से सजे स्टेशन भूमिगत महलों में बदल गए, जो आज भी यात्रियों को ऐसे शहर के नीचे ले जाते हैं जो ज़्यादातर देशों से पुराना है।
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1989
अप्रैल त्रासदी
9 April को सोवियत सैनिकों ने गवर्नमेंट हाउस के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला किया। ज़हरीली गैस और तेज़ की गई फावड़ियों ने कम-से-कम 19 लोगों की जान ली, जिनमें अधिकांश महिलाएँ थीं। इस भयावहता ने जॉर्जिया में सोवियत शासन के अंत को तेज़ कर दिया।
स्वतंत्र जॉर्जिया
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1991
स्वतंत्रता बहाल हुई
ढहते सोवियत संघ से जॉर्जिया ने स्वतंत्रता की घोषणा की। तिब्लिसी फिर एक बार संप्रभु राज्य की राजधानी बना। अगले दशक में गृहयुद्ध, बिजली कटौती और गैंगस्टर राज आया। शहर ने फिर से जीकर बचना सीखा।
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2003
रोज़ क्रांति
नवंबर में गुलाब लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों ने एडुआर्ड शेवार्दनाद्ज़े को सत्ता छोड़ने पर मजबूर कर दिया। मिखाइल साकाशविली सुधार के वादे के साथ सत्ता में आए। तिब्लिसी की गलियाँ उम्मीद और पश्चिमी झंडों से भर गईं। नतीजे कहीं अधिक उलझे हुए निकले।
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2004
सामेबा कैथेड्रल का अभिषेक
विशाल होली ट्रिनिटी कैथेड्रल बाएँ किनारे पर उठा और 2004 में अभिषिक्त हुआ। उसका सुनहरा गुम्बद क्षितिज पर छाया रहता है। कुछ लोग इसे राष्ट्रीय पुनर्जागरण का बयान कहते हैं। दूसरों को यह याद दिलाता है कि ताक़त अब भी संसद जितनी ही चर्च से बहती है।
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2010
पीस ब्रिज खुला
6 May को काँच और स्टील का पीस ब्रिज मत्क्वारी के ऊपर फैल गया। इतालवी वास्तुकार मिशेल दे लूक्की की डिज़ाइन ने तीखी बहस छेड़ दी। परंपरावादियों ने इसे नापसंद किया। युवा निवासियों ने इसे अपना लिया। यह पुल आज भी रात में सदियों के बीच टँगे प्रश्नचिह्न की तरह चमकता है।
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2015
वह रात जब नदी ने बीस जानें ले लीं
13 June को मूसलाधार बारिश ने वेरे नदी को उफनते हुए शहर के बीच ला दिया। अचानक आई बाढ़ ने घर तबाह किए, कारें बहा दीं और बीस लोगों की जान ले ली। चिड़ियाघर के जानवर सड़कों पर निकल आए। वाके में एक दरियाई घोड़े को गोली मारनी पड़ी। प्रकृति ने सबको याद दिलाया कि इन घाटियों का असली मालिक कौन है।